मांग के पुस्तक चयन सिद्धांत को स्पष्ट कीजिये - Emitra Tutorials

Wednesday, April 17, 2019

मांग के पुस्तक चयन सिद्धांत को स्पष्ट कीजिये

मांग के पुस्तक चयन सिद्धांत को स्पष्ट कीजिये

इस प्रकार इन पुस्तक-चयन कार्डों का उपयोग विभिन्न स्रोतों से पुस्तकालय की आवश्यकता अनुसार सभी संभावित क्रय योग्य एवं उपयोगी पुस्तकों का चयन करने के लिये किया जाता है । इन कार्डों को विषयों के अनुसार अलग-अलग कर लिया जाता है । फिर प्रत्येक विषय में इन्हें वर्णानुक्रम में लगा लिया जाता है । तत्पश्चात एक पुस्तक- चयन सूची तैयार कर ली जाती है, जिसे 3 प्रतियों में टाईप करवा कर अनुभागाध्यक्ष/विषयविशेषज्ञ/पुस्तक/चयन-समिति के सदस्य को अनुशंसा एवं वास्तविक-चयन प्रपत्र के साथ भेज दी जाती है |
उपरोक्त चिन्ह की पुस्तकें अलग-अलग कैबिनेटों में वर्णानुक्रम में व्यवस्थित कर देते हैं। | इनका उपयोग भविष्य में अधिक वित्तीय सहायता प्राप्त होने पर किया जा सकता है । शोधछात्र इनका उपयोग संदर्भ हेतु कर सकते है।
अंतिम रूप से स्वीकृत कार्डों की आर्डर हेतु प्रसूची तैयार कर ली जाती है । यह सूची विषयवार प्रकाशक अथवा विक्रेता के अनुसार तैयार की जाती है । इन सूचियों की तीन प्रति टाइप करवाकर आईर-पत्र व नियम शर्तों के साथ डाक द्वारा भेज दिया जाता है । पुस्तक चयन कार्डों को आर्डर क्रमांक के क्रम में जमाकर अलग ट्रे में व्यवस्थित कर लेते हैं इस प्रकार पुस्तकें पुस्तक-अर्जन के लिए तैयार हो जाती है, जिसका विवरण अगले अध्याय में दिया गया

12. सारांश (Conclusion)

इस प्रकार यह कहा जा सकता है कि पुस्तक चयन एक निरंतर प्रक्रिया है | पुस्तकों के अथाह सागर में से आवश्यकतानुसार वस्तुएं खोजने के समान यह कार्य जितना सुलभ दिखता है, उतना ही दुर्लभ कार्य है । पाठकों की आवश्यकताएं जानने हेतु पुस्तकों के साथ-साथ पाठकों से भी जीवंत संपर्क बनाये रखना पड़ता है । जहां चयनकर्ता की भूल-चूक पुस्तकालय में बहुत उपयोगी पुस्तकें खरीदने से वंचित करा सकती हैं, वहीं जरा-सी लापरवाही खराब पुस्तकों को खरीद भी सकती है । पुस्तक विक्रेता द्वारा अतिरिक्त कमीशन का लालच देकर अनुपयोगी पुस्तकों को बेचना उनके व्यवसाय का एक भाग है । बिना किसी लालच, निष्पक्ष रूप से किया गया चयन एक ओर अधिकतम पाठकों को संतुष्टि प्रदान करेगा ही, दूसरी ओर इससे पुस्तकालयाध्यक्ष को भी आत्म-संतुष्टि मिलेगी । यदि हमारे पुस्तकालय अच्छी सेवा द्वारा पाठकों का मन जीत लेते हैं तो उसका दूरगामी प्रभाव पुस्तकालयों के अधिक विकास पर अवश्य पड़ेगा । अत: पुस्तक चयन न केवल आज की आवश्यकता है, वरन कल का मुख्य स्तंभ भी है।

13. अभ्यासार्थ प्रश्न 

1. किसी साधारण एवं सस्ती पुस्तक की अनेक प्रतियों में से एक प्रामाणिक, स्तरीय, मूल्यवान पुस्तक की एक प्रति खरीदना अधिक उपयोगी है । इस कथन से आप कहां तक सहमत हैं?
2. मांग के पुस्तक चयन सिद्धांत को स्पष्ट कीजिये ।।
3. इयूई के पुस्तक चयन सिद्धांत की 'अधिकतम पाठकों के लिये न्यूनतम मूल्य पर सर्वोत्तम पुस्तक' की विवेचना कीजिये ।
4. "प्रत्येक पुस्तक को पाठक तथा प्रत्येक पाठक को पुस्तक मिले" के सिद्धांत का पुस्तक चयन में महत्व बताइये।
5. रंगनाथन के पांच सूत्रों के आधार पर पुस्तक चयन के सिद्धांतों की विवेचना कीजिये ।
6. 'उचित समय पर उचित पाठक को उचित पुस्तक मिले'- सिद्धांत की व्याख्या कीजिये ।
7. पुस्तक-चयन के विभिन्न सिद्धांतों का संक्षेप में वर्णन कीजिये ।
8. पुस्तक चयन में पाठकों की आवश्यकताओं एवं सुझावों को किस प्रकार ध्यान में रखना आवश्यक है' समझाइये ।।
9. पुस्तक चयन प्रक्रिया को समझाइये ।
10. पुस्तक चयन के प्रमुख स्रोतों को बताइये ।
14. विस्तृत अध्ययनार्थ ग्रन्थ सूची ।
1. अग्रवाल, श्याम सुंदर, पुस्तकालय संचालन तथा प्रशासन, आगरा, श्रीराम मेहरा, 1976। 2. तिवारी, भास्कर नाथ, पुस्तक चयन सिद्धांत और विधि, वाराणसी, हिन्दी प्रचारक
पुस्तकालय, 1962 3. शर्मा चंद्रकांत, पुस्तक चयन एवं रचना, इलाहाबाद, साहित्य भवन, 1975।। 4. शास्त्री, द्वारका प्रसाद, पुस्तक चयन एवं संदर्भ सेवा, इलाहाबाद, साहित्य भवन, 1976 5. Mittal, R.L., Library book selection Ed. 2. New Delhi; Metropoliton 6. Ranganathan, S.R., Library book selection ed. 2. New Delhi; Asia,
1996

इकाई - 7 : पुस्तक चयन के विभिन्न स्रोत एवं उनकी महत्ता (Different Types of Books Selection Tools and their Importance) 

उद्देश्य 1. विभिन्न प्रकार की सूचना सामग्रियों के उत्पादक/प्रकाशक एजेन्सियों द्वारा कौन-कौनसी
सूचना सामग्रियों का प्रकाशन/उत्पादन होता है, की जानकारी देना, 2. मुद्रित एवं अमुद्रित सामग्रियों के लिए प्रमुख चयन स्रोतों की पहचान करना एवं उनके
बीच अन्तर को स्पष्ट करना, 3. विभिन्न प्रकार के चयन स्रोतों की विशेषता, उपयोगिता एवं महत्ता को समझाना, 4. चयन स्रोतों का उपयोग करना एवं उनके आधार पर उत्तम मुद्रित एवं अमुद्रित
सामग्रियों का चयन करने की जानकारी देना ।। संरचना
1. विषय प्रवेश 2. पुस्तक चयन का अर्थ 3. सूचना सामग्री के प्रकाशक एवं उनके प्रकाशक 4. पुस्तक चयन के स्रोत 5. अन्य मुद्रित सामग्रियों के चयन स्रोत 6. अमुद्रित सामग्रियों हेतु चयन स्रोत 7. अमुद्रित सामग्रियों के उपकरण हेतु चयन स्रोत 8. सारांश 9. अभ्यासार्थ प्रश्न
10. विस्तृत अध्ययनार्थ ग्रन्थ सूची ।

1. विषय प्रवेश

पुस्तकालय का एक महत्वपूर्ण कार्य संग्रह विकास (Collection Development) करना है । पाठकों की आवश्यकता की पूर्ति हेतु पुस्तकालय अनेक प्रकार की मुद्रित एवं अमुद्रित सामग्रियों का चयन करके उसे क्रय करता है या फिर किसी अन्य माध्यम से उसे प्राप्त करता है । इन सामग्रियों के चयन हेतु विभिन्न प्रकार के चयन स्रोत होते हैं । इन चयन स्रोतों में प्रलेखों के बारे में महत्वपूर्ण कथात्मक सूचनाएं (Bibliographical Information होती हैं । जिनके आधार पर पुस्तकालय उत्तम प्रलेखों का चयन कर सकता है । अत: पुस्तकालयाध्यक्ष को संग्रह विकास के लिए इन स्रोतों के बारे में जानकारी होनी चाहिए ।
इस इकाई में आपको पुस्तक चयन का अर्थ, सूचना सामग्रियों के प्रकाशन/उत्पादक विभिन्न प्रकार के मुद्रित एवं अमुद्रित सामग्रियों के लिये चयन स्रोत एवं इन स्रोतों की विशेषताएं इत्यादि के बारे में जानकारी उपलब्ध करवायी गयी है ।।

2. पुस्तक चयन का अर्थ (Meaning of Book Selection)

पाठ्य सामग्री का चयन सामान्य रूप से पाठक की आवश्यकता की पूर्ति एवं पुस्तकालय के संग्रह में वृद्धि करने के लिए किया जाता है । विभिन्न स्तर एव रूचि के पाठकों की बौद्धिक आवश्यकता हेतु विभिन्न विषयों से सम्बंधित उपयोगी पाठ्य सामग्री का चयन पुस्तकालय के लिए अनिवार्य है । पुस्तकालय सेवा की सफलता और असफलता मुख्य रूप से विभिन्न प्रकार के मुद्रित एवं अमुद्रित पाठ्य सूचना सामग्रियों पर ही निर्भर होती है । पुस्तक चयन के विभिन्न सिद्धान्तों को विस्तार में इकाई 6 में आपने पढ़ा है । 

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