पांच मूलभूत श्रेणियों की विस्तृत जानकारी प्राप्त करने के लिये कोर्स - Emitra Tutorials

Saturday, January 26, 2019

पांच मूलभूत श्रेणियों की विस्तृत जानकारी प्राप्त करने के लिये कोर्स

पांच मूलभूत श्रेणियों की विस्तृत जानकारी प्राप्त करने के लिये कोर्स

(Inverted Comma) नोट :- पांच मूलभूत श्रेणियों की विस्तृत जानकारी प्राप्त करने के लिये कोर्स 2A इकाई-मूलभूत श्रेणियों की अवधारणा का अवलोकन कीजिए। 5.1 आवर्तन एवं स्तर आवर्तन (Rounds)
प्रायोगिक दृष्टिकोण से अवलोकन करने पर यह स्पष्ट होता है कि [P], [M] व [E] का उसी विषय में एक से अधिक बार प्रयोग हो सकता है; अर्थात् इनका एक से अधिक बार आवर्तन। इनके विभिन्न आवर्तनों को पक्ष-परिसूत्रों में निम्न प्रकार के संक्षिप्त प्रतीकों द्वारा व्यक्त किया जाता है:मूलभूत श्रेणियां प्रथम आवर्तन | दवितीय आवर्तन तृतीय आवर्तन
[3E] नोट - [S] व [T] के आवर्तन नहीं होते।
[P] एवं [M] का प्रथम आवर्तन [E] के पूर्व, वितीय आवर्तन [E] के प्रथम आवर्तन के बाद, तृतीय आवर्तन [2E] के बाद होता है। प्रायः सभी पक्ष परिसूत्रों में [E] के बाद [2P] तथा [2E] के बाद [3P] को एक यौगिक के रूप में प्रयोग में लाया जाता है, अर्थात् [E] Cum[2P] या [E] [2P] एवं [2E] Cum[3P] या [2E][3P] के रूप में। इस प्रकार पक्ष परिसूत्र एवं वर्गीक में इनको अलग नहीं दिखाया जाता है। उदाहरण -
शीर्षक - X-ray treatment of throat cancer. वर्गीक - L 177 : 47257 : 6253 पक्ष परिसूत्र - L[P] : [E] [2P] : [2E] [3P]
इस पक्ष-परिसूत्र के अनुसार उपर्युक्त वर्गीक में [P] एवं [E] के आवर्तन निम्नलिखित प्रकार से दिखाई देते है;
L[BC] = Medicine (मुख्य वर्ग) 177 [P]
= Throat, [P] का प्रथम आवर्तन 4 [E] = Disease, [E] का प्रथम आवर्तन 725 [2] = Cancer, [P] का दूसरा आवर्तन

6[2E] = Treatment, [E] का दूसरा आवर्तन

253 [3P] = X-ray, [P] का तीसरा आवर्तन, यहां [E] के साथ [2P] एवं [2E] के साथ [3P] जुड़ा हुआ है। मुख्य वर्ग L, J, Y आदि में इस प्रकार के आवर्तन पाये जाते हैं। स्तर (Levels)
| [P] एवं [M] का एक से अधिक बार प्रयोग हो सकता है, इसे स्तर के नाम से जाना जाता है। [s] एवं [T] के भी स्तर होते है। इन सभी स्तरों को निम्न प्रकार के संक्षिप्त प्रतीकों द्वारा व्यक्त किया जाता है
[P] के स्तर [P1], [P2]), [P3], [P4] [M] के स्तर [M1], [M2] आदि [S] के स्तर [S1], [S2]), [S3], [S4]
[T] के स्तर [T1], [T2] Hey gof a= Generalia Bibliography, O= Literature, P= Linguistics, N= Fine Arts, Z= Law में [P] पक्ष का एक से अधिक बार प्रयोग हुआ है:उदाहरण
शीर्षक- Injunction in ex parte judgment of Civil Cases in Indian Law. यहां मुख्य वर्ग Z=Law है। पक्ष परिसूत्र Z [P], [P2]), [P3], [P4] वर्गीक Z44, 71, 73, 5
पक्ष परिसूत्र के अनुसार उपर्युक्त वर्गीक में [P] पक्ष का निम्न चार स्तर पर प्रयोग किया गया है।
Z [BC] = Law (मुख्य वर्ग) 44 [P1] = Indian (भारतीय समुदाय) [P] का प्रथम स्तर 71 [P2] = Civil action, [P] का दूसरा स्तर, 73 [P3] = Ex Parte Judgment, [P] का तीसरा स्तर,
5 [P4] = Injunction, [P] का चौथा स्तर, 6. वैश्लेषी-संश्लेषणात्मक प्रक्रिया
विबिन्दु वर्गीकरण पद्धति एक वैश्लेषी-संश्लेषणात्मक वर्गीकरण पद्धति है। इस पद्धति में विषयों के पूर्वनिर्मित वर्गीक उपलब्ध नहीं है। यहां विभिन्न विषयों के अन्तर्गत विभिन्न पक्षों के लिये पृथक-पृथक मानक इकाइयों को व्यक्त करने वाली अनुसूचियां दी गई हैं, अर्थात [P] पक्ष के अन्तर्गत व्यक्तित्व पक्ष की, [M] के अन्तर्गत पदार्थ पक्ष की, [E] के अन्तर्गत ऊर्जा पक्ष की अनुसूचियां। विभिन्न इकाइयों की एकल संख्यायें संबंधित पक्षों से लेकर विभिन्न विषयों के वर्गीक बनाये जाते हैं। वर्गीक बनाने की प्रक्रिया में निम्नलिखित चरण अपनाये जाते हैं:

(क) विशिष्ट विषय का उसकी संघटक इकाईयों (पदों) में विश्लेषण करना,

(ख) इकाइयों (पदों) की पहचान करके उनके पक्ष का निर्धारण करना (ग) पक्षों का निर्धारण करने के बाद उनका पक्ष-परिसूत्र के अनुसार कम निर्धारण करना, (घ) प्रत्येक इकाई (पद) को अनुसूची में निर्धारित एकल संख्या प्रदान करना, (ङ) प्रत्येक पक्ष का सांकेतिक चिन्ह लगाकर विभिन्न एकल संख्याओं का संश्लेषण करना।
इस प्रक्रिया को समझाने के लिये निम्नलिखित उदाहरण प्रस्तुत किये जा रहे हैं :शीर्षक : 19 वीं शताब्दी में यूरोप के राष्ट्रीय पुस्तकालयों में पांडुलिपियों का सूचीकरण
Cataloguing of manuscripts in National Libraries of Europe
during 19th Century इस आख्या से स्पष्ट है कि यह ग्रन्थ Library Science मुख्य वर्ग से संबंधित है। इस प्रकार इसका मुख्य वर्ग Library Science है।
(क) आख्या के संघटक पद : Cataloguing, Manuscripts, National Libraries, Europe, 19th Century.
(ख) संघटक पदों की पहचान एवं मूलभूत श्रेणी का निर्धारण : Cataloguing प्रक्रिया है अत: यह Energy [E] पक्ष को सूचित करती है, Manuscripts पदार्थ है अत: यह Matter [M] पक्ष को सूचित करता है; National Libraries एक प्रकार का ग्रन्थालय है अत: यह Personality [P] पक्ष को सूचित करता है; Europe भूभाग है अत: यह Space [S] पक्ष को सूचित करता है 19th Century समय है अत: Time [T] पक्ष का द्योतक है। । (ग) मुख्य वर्ग Library Science का पक्ष परिसूत्र है- 2 [P]; [M]; [E][2P] तथा Space व Time सर्वसामान्य पक्ष है अत: इस पक्ष परिसूत्र के अनुसार आख्या के पदों का क्रम इस प्रकार है:
Library Science (MC). National Library [P]. Manuscripts [M]. Cataloguing [E]. Europe [S]. 19th Century [T].

(घ) अनुसूचियों में निर्धारित एकल संख्या प्रत्येक पद के स्थान पर रखना - 

नोट- 12[M] (मुख्य वर्ग Generalia Bibliography के [P] पक्ष से, तथा 5[S] स्थान एकल अनुसूची से (पृष्ठ 2.8 से 2.17); M[T] काल एकल अनुसूची से (पृष्ठ 2.7) लिया गया है।
। (इ) संकेतक चिन्ह लगाकर एकल संख्याओं का संश्लेषण 213; 12: 55.5 ' M= संश्लेषित वर्गीक
नोट- पक्ष परिसूत्र के अनुसार 2[MC] तथा 13[P] के मध्य Personality का संकेतक चिन्ह नहीं लगाया गया है। यह अपवाद है। शीर्षक : प्रेमचन्द द्वारा रचित गोदान (5 वीं कृति)
Premchand's Godan (5th Work)
21
इस आख्या से स्पष्ट है कि यह ग्रन्थ मुख्य वर्ग Literature से संबंधित है। Godan उपन्यास है, भाषा हिन्दी है, Premchand का जन्म वर्ष 1880 है।
Literature का पक्ष परिसूत्र - O [P1], [P2], [P3], [P4] यहां (MC) = Literature
[P1] = Language [P2] = Form [P3] = Author
[P4] = Work (क) आख्या के संघटक पदः- Premchand (1880)
Godan (Fifth work). Literature. Hindi. Fiction (ख) संघटक पदों की पहचान व मूलभूत श्रेणी :
Premchand (1880) [P3]. Godan (5th work) [P4]. Literature (MC).
Hindi [P1]. Fiction P[2]. (ग) पक्ष परिसूत्र के अनुसार पदों का अनुक्रम :
Literature (MC). Hindi [P1]. Fiction P[2]. Premchand (1880) [P3].
Godan (5th work) [P4]. (घ) प्रत्येक पद की एकल संख्या :
O [MC]. 152[P].[P2].M80[P3].5[P4]

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