राष्ट्रीय पुस्तकालय - Emitra Tutorials

Thursday, January 3, 2019

राष्ट्रीय पुस्तकालय

राष्ट्रीय पुस्तकालय

(ii) वाचनालय : राष्ट्रीय पुस्तकालय में एक मुख्य वाचनालय है जिसमें एक साथ 320 पाठकों के बैठने की क्षमता है। मुख्य वाचनालय के अतिरिक्त 10 कक्ष और भी है। जहाँ विषय विशेष से सम्बन्धित साहित्य संग्रहित है।
(iii) वाङ्गमय सूची एवं संदर्भ सेवा
राष्ट्रीय पुस्तकालय ने 1951 में वाङ्गमय सूची विभाग का आरम्भ किया। इस विभाग का उद्देश्य पुस्तकालय एवं सूचना सेवा के सक्रिय एजेंट के रूप में कार्य करना है जिससे की सूचना एवं ज्ञान का प्रसार एक प्रभावी ढंग से संगठित रूप में हो सके। यह विभाग शोधकर्ता, लेखकों आदि को उनकी आवश्यकता के अनुसार माँग पर किसी भी विशिष्ट विषय के पर उपलब्ध साहित्यों की सूची नि:शुल्क उपलब्ध करा देती है। इस प्रकार की सूचियाँ सामान्यतः चुनिन्दा और लघु होती है। कभी-कभी दूसरी संस्थाओं के सहयोग से गहन एवं विस्तृत सूचियाँ भी तैयार की जाती है ।
कुछ राष्ट्रीय हित के विषयों पर वाङ्गमय सूचियाँ खण्डों में तैयार होती रहती है। उदाहरण स्वरूप भारतीय संस्कृति की वाङ्गमय सूची चार खण्ड में प्रकाशित हो चुकी है। भारतीय वनस्पति शास्त्र के दो खण्ड प्रकाशित हो चुके है। बांग्ल साहित्य और भाषा की सूचियाँ भी प्रकाशित हो चुकी है। पुस्तक आवप्ति अधिनियम 1954 व 1956 के अन्तर्गत प्राप्त पुस्तकों की पुस्तकालय का केन्द्रीय संदर्भ विभाग वाङ्गमय सूची तैयार करता है। इसका प्रकाशन मासिक होता है।
जो पाठक पुस्तकालय आते है उन्हें तो संदर्भ सेवा दी ही जाती है, साथ ही साथ टेलीफोन और डाक के द्वारा भी संदर्भ सेवा प्रदान की जाती है। तात्कालीन और दीर्घकालीन दोनों प्रकार की संदर्भ सेवा प्रदान की जाती है।

(iv) रिप्रोग्राफी सेवायें

मुख्य वाचनालय के साथ-साथ अन्य वाचनालय में फोटो स्टेट मशीनें उपलब्ध है। पाठकों की मॉग पर पत्रिकाओं के लेख आदि की फोटो कापी सामान्य दर पर उपलब्ध करा दी जाती है। पुस्तकालय के अन्दर लघु प्रलेखों की छपाई हेतु सुविधा उपलब्ध है।

(v) सामयिक अधिग्यता सेवा

भारतीय राष्ट्रीय पुस्तकालय अपने पाठकों को सामयिक अभिग्यता सेवा भी प्रदान करता है।
अगर हम विश्व के अन्य देशों के राष्ट्रीय पुस्तकालय से इसकी तुलना करते है तो पाते है कि भारतीय राष्ट्रीय पुस्तकालय अपनी शैशव अवस्था में है। सन् 1968 में भारतीय सरकार द्वारा देश के श्रेष्ठ शिक्षाविदों की एक समिति का गठन पुस्तकालय के कार्यों की समीक्षा करने और उसके विकास में सुझाव देने के लिए किया। समिति ने अपना सुझाव सरकार को प्रस्तुत कर दिये। आज तक इन सुझावों को व्यावहारिक रूप नहीं प्रदान किया गया है।
एस. आर. रंगनाथन ने वर्तमान भारतीय राष्ट्रीय पुस्तकालय के संबंध में अपने विचार प्रकट करते हुए लिखा है "सन् 1903 में लाई कर्जन द्वारा संस्थापित इम्पीरियल लाइब्रेरी के नाम को राष्ट्रीय पुस्तकालय में परिवर्तित कर देने मात्र से, उसके समस्त पुस्तकालय कार्य पूरे नहीं हो जाते है। इसके परामर्शदाताओं को संघीय सरकार को यह मानने के लिए तैयार करना चाहिए किः ।
(i) राष्ट्रीय पुस्तकालय को जन पुस्तकालयों के राष्ट्रीय तन्त्र के शीर्ष (Apex) के रूप में
| कार्य करने के लिए निर्मित करना अथवा संचालित करना चाहिए, जबकि
(ii) यह (वर्तमान भारतीय राष्ट्रीय पुस्तकालय) केवल संस्कृति के राष्ट्रीय चिन्ह-स्वरूप निर्मित किया गया है,
(iii) यह कुछ शताब्दी पूर्व संस्थापित ब्रिटिश म्यूजियम लायब्रेरी की अनुलिपि (Version) के
रूप में - जन ग्रन्थालय विचार के विकसित होने से काफी पूर्व निर्मित किया गया था,
(iv) इसका निर्माण विद्वानों के उपयोगार्थ किया गया था न कि देश के समस्त लोगो के उपयोगार्थ; अत:
 (v) इसका विकास कभी भी इस आधार पर नहीं हुआ जो आज के प्रसंग में इसको होना चाहिए।"

9. यू. के. का राष्ट्रीय पुस्तकालय (National Libraries of UK)

ब्रिटिश म्यूजियम पुस्तकालय अब ब्रिटिश लायब्रेरी नाम से जाना जाता है। यह ब्रिटेन का राष्ट्रीय पुस्तकालय है। ब्रिटेन का राष्ट्रीय संग्रहालय और पुस्तकालय दोनो एक संस्था के रूप में लन्दन में स्थित है। आरम्भ में यह 18वीं शदी में ब्रिटेन के एक चिकित्सक, सर हेन्सस्लोने की यह व्यक्तिगत सम्पत्ति थी। बाद में उन्होंने राष्ट्र के उपयोग हेतु सरकार को बेच दिया। ब्रिटिश शासन ने सन् 1753 में एक अधिनियम पारित कर इसे एक राष्ट्रीय संस्था के रूप में स्थापित किया। प्राचीनता और विशालता की दृष्टि से यह विश्व का दूसरा महान राष्ट्रीय पुस्तकालय है। ब्रिटिश शासन ने सन् 1967 में इसके पुन: संगठन पर विचार करने के लिए एक समिति गठित की। समिति की संस्तुति के अनुसार 1973 में इसका पुन: संगठन किया गया। पहले से विद्यमान निम्नलिखित चार स्वतन्त्र पुस्तकालय संगठनों को मिलाकर ब्रिटिश लायब्रेरी नाम से एक नया संगठन बनाया गया:
(i) The British Museum Library,
(ii) The National Central Library,
(iii) The British National Bibliography, and
(iv) The Office of Scientific and Technical Information.
सन् 1982 में इण्डिया ऑफिस लाइब्रेरी तथा सन् 1963 में नेशनल साउन्ड आरकाइवस को भी इसमें शामिल कर लिया गया।
इस पुस्तकालय के संचालन के लिए एक बोई है जिसमें एक अध्यक्ष, तीन विभागों के निदेशक तथा नौ सदस्य होते है जिन्हें ग्रन्थालय, वित्त, उद्योग, विश्वविद्यालय तथा प्रशासन का अनुभव होता है। अध्यक्ष तथा बोर्ड के नौ सदस्य अंशकालिक होते है।

9.1. विभाग तथा कार्य

ब्रिटिश पुस्तकालय के निम्नलिखित विभाग है:
9.1.1. विज्ञान तकनीकी और उद्योग विभाग
ब्रिटिश पुस्तकालय का यह विभाग विज्ञान, तकनीकी तथा उद्योग में अद्यतन शोध एवं उसके विकास के लिए गहन साहित्यिकी स्रोतों को उपलब्ध कराता है।
9.1.2. मानविकी तथा सामाजिक विज्ञान विभाग
ब्रिटिश पुस्तकालय के इस विभाग में कुछ पुस्तकें संदर्भ के लिए तथा कुछ विशेष लोन (Loan) के लिए होती है। इस विभाग का उपयोग शैक्षणिक अध्यापक, स्नातकोत्तर विद्यार्थी, पुस्तकालयाध्यक्ष, सूचना वैज्ञानिक, पत्रकार तथा अन्य खोजी प्रकृति के व्यवसायी पाठक पत्र (Readers'Pass) के आधार पर कर सकते है। इस विभाग के निम्नलिखित पाँच घटक है:
(i) संकलन विभाग (ii) लोक सेवा विभाग (i) विशेष संकलन विभाग (iv) नेशनल; साउन्ड आरकाईवस विभाग
(V) संरक्षण विभाग

9.1.3. वाङ्गमय सूची सेवा विभाग

ब्रिटिश पुस्तकालय का यह विभाग "British National Bibliography" (BNB) का प्रकाशन करता है। Copyright Act, 1911 जो कि British Library Act, 1972 के द्वारा संशोधित किया गया, के अन्तर्गत ब्रिटेन में प्रकाशित प्रत्येक पुस्तक की प्रति इसको निःशुल्क प्राप्त होती है। यह विभाग BNB का प्रकाशन नियमित रूप से करता है। BNB के अतिरिक्त यह विभाग अनेक प्रकार के मुद्रित एवं माइक्रोफिल्मस की वाङ्गमय सूचियाँ भी तैयार करता है।
ब्रिटेन का राष्ट्रीय पुस्तकालय "ब्रिटिश लाइब्रेरी" विश्व का महानतम और आधुनिकतम पुस्तकालयों में से एक है। आज यह पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान के शोध को प्रोत्साहन करने में अहम भूमिका निभा रही है। पुस्तकालय में आधुनिक तकनीयों के प्रयोग में भी यह विश्व को पथ प्रदर्शित कर रहा है।
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