पंक्ति (Array) में सहायक अनुक्रम के सिद्धान्त तथा उसका प्रयोग - Emitra Tutorials

Wednesday, January 23, 2019

पंक्ति (Array) में सहायक अनुक्रम के सिद्धान्त तथा उसका प्रयोग

पंक्ति (Array) में सहायक अनुक्रम के सिद्धान्त तथा उसका प्रयोग

रंगनाथन ने पंक्ति (Array) में सहायक अनुक्रम के लिये आठ सिद्धान्त प्रतिपादित किये हैं तथा उसका प्रयोग सी.सी. में पंक्ति के एकलों को व्यवस्थित करने के लिये किया गया है |
1. परवर्ती काल का सिद्धान्त Principle of Latter-in-Time
2. परवर्ती विकास का सिद्धान्त
Principle of Latter-in-Evolution 3. स्थानीय समीपता का सिद्धान्त
Principle of Spatial Contiguity 4. परिमाण, संख्या या मात्रा का सिद्धान्त Principle of Quantitative Measure 5. जटिलता वृद्धि का सिद्धान्त
Principle of Increasing Complexity 6. प्रामाणिक अनुक्रम का सिद्धान्त
Principle of Canonical Sequence 7. साहित्यिक मांग का सिद्धान्त
Principle of Literary Warrent 8. वर्णानुक्रम का सिद्धान्त
Alphabetical Sequence
103
उपर्युक्त सिद्धान्त के आधार पर व्यवस्थित एकल विचारों व उनके लिये प्रयुक्त अंक यन्त्रवत स्मृति सहायक अंकन की उत्पत्ति करते हैं । रंगनाथन द्वारा प्रतिपादित उपर्युक्त सिद्धान्तों का वर्णन अलग । से अन्य इकाई (Unit) में किया गया है । कुछ उदाहरण निम्न काल अनुक्रम (Time Sequence) से सम्बन्धित उदाहरण
पर्युक्त उदाहरण से स्पष्ट है कि सी.सी. में इस सिद्धान्त का पूर्णतः पालन हुआ है। जबकि डी.डी.सी. एवं यू.डी.सी. में कुछ हद तक इस सिद्धान्त का पालन हुआ है ।
परवर्ती विकास (Evolutionary Sequence) के सिद्धान्त को भी एक उदाहरण द्वारा समझा जा सकता है:
सी.सी. व यू.डी.सी. में पूर्ण रूप से इस उपसूत्र का पालन हुआ है । जबकि डी.डी.सी. में ऐसा नहीं हुआ है ।। 6.4 मौलिक समृति सहायक (Seminal Mnemonics)
जब किसी वर्गीकरण पद्धति में किसी एक ही विचार या इससे मिलते जुलते विचार को अभिव्यक्त करने के लिए एक ही प्रकार के अंको का प्रयोग किया जाता है तो उसे मौलिक स्मृति सहायक कहते हैं ।

मौलिक स्मृति सहायक के उपसूत्र (Cannon of Seminal Mnemonics)

इस उपसूत्र के अनुसार 'एक वर्गीकरण पद्धति में मूलसमरूप अवधारणाएँ (seminally Equivalent) चाहे किसी भी विषय में विद्यमान हो, को अभिव्यक्त करने के लिए एक निश्चित अंक का प्रयोग करना चाहिए ।' अर्थात किसी एक धारणा या विचार अथवा उससे मिलते जुलते विचारों का प्रतिनिधित्व सभी विषयों में एक निश्चित अंक द्वारा होना चाहिये,
चाहे इस विचारधारा की अभिव्यक्ति के लिए अलग-अलग विषयों में अलग-अलग प्रकार के पदों (Trems) का प्रयोग क्यों न किया गया हो ।
विबिन्दु वर्गीकरण पद्धति ही एकमात्र पद्धति है जिसमें इस उपसूत्र के अनुरूप ही मौलिक विचारों एवं अवधारणाओं ले अभिव्यक्त किया गया है । उदाहरणार्थ
अंक 3 का प्रयोग अलग-अलग मुख्य वर्गों में अलग-अलग पदों के लिए हुआ है, किन्तु ये सभी पद मौलिक स्तर पर एक ही प्रकार की  इस इकाई में हमने अंकन के अर्थ, परिभाषा, आवश्यकता, कार्य, प्रकार, इत्यादि का अध्ययन किया । हमने एक अच्छे अंकन के गुण तथा स्मरणशीलता का भी विश्लेषण किया ।
अंकन प्रतीकों व चिन्हों की एक ऐसी व्यवस्था है । जिसका प्रयोग प्राकृतिक भाषा के पदों व शब्दों को व्यक्त करने के लिये किया जाता है । अंकन के आधार के लिये विभिन्न प्रजाति के प्रतीकों व चिन्हों का प्रयोग किया जाता है । जैसे- हिन्द-अरबी अंक, रोमन दीर्घ व रोमन लघु अक्षर, ग्रीक अक्षर, गणितीय चिन्ह, विराम चिन्ह इत्यादि । इसी के आधार पर अंकन दो प्रकार के होते है- शुद्ध अंकन व मिश्रित अंकन । पुस्तकालय में पाद्य सामग्री को सहायक अनुक्रम में व्यवस्थित करने के लिए अंकन अत्यन्त आवश्यक हैं । सरलता, संक्षिप्तता, लचीलापन, संश्लेषणात्मकता, अभिव्यंजकता, सापेक्षता आदि अच्छे अंकन के गुण है । इन सभी गुणों पर विस्तार से चर्चा की गयी है | इस इकाई के अन्त में पारिभाषिक शब्दावली अभ्यासार्थ प्रश्न विस्तृत अध्ययन के लिए ग्रन्थ सूची उपलब्ध करवायी गयी है ।

8. पारिभासिक शब्दावली

| प्रथमाक्षरी नाम (Acronym): ऐसा शब्द जिसका निर्माण शब्द के अक्षरों के समूह के प्रथम अक्षर से होता है ।
भिन्नार्थक शब्द (Homonyms) : ऐसे शब्द जिसका अर्थ अलग- अलग हो, किन्तु उसकी वर्तनी एक समान या अलग हो, लेकिन उच्चारण एक ही तरह से होता हो ।
पर्यायवाची शब्द (यनsynonyms): शब्द जिसके कि एक समान या लगभग समझ अर्थ हो ।
प्राकृतिक भाषा (Natural Language): बोल-चाल की सामान्य प्रचलित भाषा । यन्त्रवत् (Mechanical): मशीन के समान शीघ्र कार्य करने का गुण ।
वर्गीकृत (Classifier): किसी वर्गीकरण पद्धति के आधार पर प्रलेखों को वर्गीकृत करने वाला व्यक्ति ।
105
वर्गाचार्य (classifyicanist): किसी वर्गीकरण पद्धति का निर्माण करने वाला व्यक्ति ।
पंक्ति वर्ग (Class in Array): ऐसे वर्ग जो समान स्तर के होते हैं, एक दूसरे के अधीन नहीं होते ।।
संश्लेषण (Synthesis): विभिन्न भागों व तत्वों को जोड़ना जिससे कि एक समुच्चय का निर्माण हो सके । 9. अभ्यासार्थ प्रश्न 1. ग्रन्थालय वर्गीकरण में अंकन को परिभाषित कीजिए | इसकी आवश्यकता पर प्रकाश
डालिए । 2. वर्गीकरण में अंकन के कार्यों का वर्णन कीजिए । 3. अच्छे अंकन के गुणों का वर्णन करते हुये वर्गीकरण में अंकन के को बताइये ।। 4. 'अंकन वर्गीकरण को बनाता तो नहीं है, अपितु उसे बिगाड़ सकता है । इस कथन को
स्पष्ट कीजिए ।'

5. अंकन कितने प्रकार के होते है? उनके गुणों तथा दोषों का वर्णन कीजिए ।

6. 'स्मरणशीलता' को परिभाषित कीजिए तथा इसके विभिन्न प्रकारों का वर्णन कीजिए । 10. सन्दर्भ ग्रन्थ 1. Bliss, H.E., organization of knowledge in libraries, 2nd ed., wilson,
N.Y., 1939 2. Dhyani, Pushpa, Library Classification, Ess, New Delhi., 1999 3. Foskett, A.C., Subject Approach to Information, 3rd ed., Clive
Bingley, London., 1977 4. Krishan Kumar, Theory Of Classification, Vikash Publishing House,
New Delhi., 19 5. Ranganathan, S.R., prolegomena to library classification, 3rd ed.,
Sarda Ranganathana Endowment, Bangalore., 1967 6. Sayers, W.C.B., Manual of Classification, 3rd ed., Andre Deutsh:

इकाई-8: पंक्ति एवं श्रृंखला ग्राह्यता (Hospitality In Array And Chain) उद्देश्य

1. इस इकाई के उद्देश्य निम्नलिखित है :2. पंक्ति एवं श्रृंखला की अवधारणा की जानकारी प्रदान करना, 3. पंक्ति एवं श्रृंखला के उपसूत्रों के बारे में बताना, एवं
4. पंक्ति एवं श्रृंखला में ग्राह्यता प्राप्त करने के लिये विभिन्न विधियों का प्रयोग बताना। संरचना / विषय वस्तु
1 विषय प्रवेश 2 पंक्ति एवं श्रृंखला का अर्थ 3 पंक्ति के लिए उपसूत्र
3.1 निःशेषता का उपसूत्र 3.2 | अनन्यता अनुक्रम का उपसूत्र 3.3 सहायक अनुक्रम का उपसूत्र 3.4 समरूप अनुक्रम का उपसूत्र
3.5 पंक्ति में ग्राह्यता 4 श्रृंखला के लिये उपसूत्र
4.1 विस्तार हास का उपसूत्र । 4.2 क्रम सम्बद्धता का उपसूत्र
4.3 श्रृंखला में ग्राहयता 5 सारांश 6 अभ्यासार्थ प्रश्न 7 पारिभाषिक शब्दावली
8 विस्तृत अध्ययनार्थ ग्रन्थसूची। 1 विषय प्रवेश

No comments:

Post a Comment