7.1. संग्रह के विकास एवं संरक्षण सम्बंधी कार्य - Emitra Tutorials

Thursday, January 3, 2019

7.1. संग्रह के विकास एवं संरक्षण सम्बंधी कार्य

7.1. संग्रह के विकास एवं संरक्षण सम्बंधी कार्य

राष्ट्रीय पुस्तकालय के दो प्रमुख कार्य होते है। प्रथम तो यह है कि यह न राष्ट्र में प्रकाशित अपितु विदेशों में भी प्रकाशित प्रलेखों को संग्रह करना और वितीय भविष्य के उपयोग के लिए सुरक्षित रखना। राष्ट्र में प्रकाशित पुस्तकें तो इसे डिलीवरी ऑफ बुक्स एक्ट के अधीन निःशुल्क प्राप्त होते है। विदेशी प्रकाशनों को निम्न प्रकार से प्राप्त करना चाहिए। 
(i) प्रमुख शासकीय प्रकाशनों को दूसरे देश के राष्ट्रीय केन्द्रीय पुस्तकालयों के सहयोग से
पारस्परिक विनिमय के आधार पर प्राप्त करें,
(ii) संस्था और व्यक्तिगत प्रकाशन जो महत्वपूर्ण तथा आवश्यक है उसे क्रय द्वारा प्राप्त करें,
(iii) संयुक्त राष्ट्र संघ और उसके सभी अंगों के प्रकाशनों को उपहार प्राप्त करें,
(iv) दुर्लभ ग्रंथ और महत्वपूर्ण हस्तलिखित ग्रन्थों के संग्रह को क्रय द्वारा करे,
(v) देश के दिवंगत प्रमुख विद्वानों और वैज्ञानिकों के व्यक्तिगत ग्रन्थ संग्रह को प्राप्त करने की दिशा में इसे ध्यान देना चाहिए,!
(vi) अतिरिक्त प्रतियां : राष्ट्रीय केन्द्रीय पुस्तकालय में अप्राप्य एवं आवश्यक प्राचीन देशी एवं विदेशी प्रकाशनों को प्राप्त करने के लिए डॉ. रंगनाथन ने एक उपयुक्त सुझाव दिया है। केन्द्रीय पुस्तकालय देश-विदेश के अन्य पुस्तकालयों से सम्पर्क स्थापित करें और पारस्परिक आदान-प्रदान के माध्यम से पुस्तकालयों में उपलब्ध उपयोगी अतिरिक्त प्रतियों को प्राप्त करें। इस तरह राष्ट्रीय केन्द्रीय पुस्तकालयों को हमेशा अपने संग्रह को अद्यतन बनाये रखना चाहिए। इस रूप में यह राष्ट्रीय स्तर पर भण्डार (Reservoir) पुस्तकालयों के रूप में कार्य करता है ।।

7.2. प्रसार सम्बन्धी कार्य

राष्ट्रीय पुस्तकालय का जहाँ एक ओर पुस्तक, पत्र - पत्रिकायें और अन्य पाठ्य-सामग्री को संग्रह करना है वही इसके बारे में पाठकों को सूचना प्रदान करना भी इसका मुख्य कार्य है। इस कार्य को व्यवहारिक रूप में निम्न प्रकार से किया जा सकता है।
(i) माइक्रोफार्मस और मशीन रिडेबल फार्म के रूप में सूची प्रकाशित करें,
(ii) विभिन्न विषयों पर पूर्व प्रकाशित पुस्तकों की ग्रन्थसूची संकलित करें,
(iii) वर्तमान में प्रकाशित होने वाले शोध तथा अन्य पत्र-पत्रिकाओं की निर्देशिका प्रकाशित करें,
(iv) राष्ट्रीय हित के वर्तमान साहित्य का सारांश तैयार करना और उसे प्रकाशित करना,
(v) सहकारी वर्गीकरण और सूचीकरण कार्य को मूर्त रूप देना। भारत जैसे बहु भाषी देश में
यह कार्य दो स्तरों पर करना चाहिए
(i) प्रादेशिक भाषाओं में प्रकाशित गन्थों का और
(ii) राष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित राष्ट्रीय भाषाओं में गन्थों का।

7.3. राष्ट्रीय ग्रन्थ सूची

। देश के सभी नागरिकों को अपने विषयों से सम्बन्धित तथा सरकार को नवीनतम प्रकाशनों से अवगत कराने के लिए नियमित रूप से राष्ट्रीय ए-थ सूची प्रकाशित करना राष्ट्रीय पुस्तकालय का एक महत्वपूर्ण कार्य है। सर्वप्रथम फ्रांस के राष्ट्रीय केन्द्रीय पुस्तकालय ने सन् 1811 में राष्ट्रीय ग्रन्थ सूची के विचार को मूर्त रूप दिया गया और तब से विश्व के अधिकांश देशों में विविध प्रकार से इसका प्रकाशन हो रहा है। भारत में भी राष्ट्रीय ग्रन्थसूची केन्द्रीय संदर्भ पुस्तकालय, कोलकाता के दारा प्रकाशित होती रही है। 7.4. पाठक सेवायें
राष्ट्रीय पुस्तकालय का एक महत्वपूर्ण कार्य यह भी है कि वह विशिष्ट पाठकों को उनके माँग के अनुरूप सेवायें प्रदान करे। इसके अन्तर्गत निम्न कार्य सम्मिलित है।
(i) गहन अध्ययन करने वाले पाठक जैसे शोधकर्ता, लेखक और विद्वानों को पढ़ने और
परामर्श देने के लिए सभी प्रकार की सुविधा उपलब्ध कराना
(ii) संदर्भ और सूचना सेवायें उपलब्ध करना,
(iii) राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अन्त:पुस्तकालय आदान-प्रदान की सेवायें उपलब्ध
करना,
(iv) प्रलेखन सेवायें प्रदान करना,
(v) सरकार, व्यापार और उद्योग के लिए विशिष्ट सेवायें प्रदान करना एवं उनको विशिष्ट
तकनीकी आवश्यकता के अनुरूप ग्रंथसूची आदि का निर्माण करना एवं
(vi) रेफरल केन्द्र के रूप में सेवाये प्रदान करना। उनके विशिष्ट प्रकार की आवश्यकता के
| अनुरूप सूचना आदि की खोज में भी मदद करना।

7.5. समन्वयात्मक कार्य

राष्ट्रीय पुस्तकालय को देश का सर्वोच्च मुख्य पुस्तकालय होने के कारण इसे हर स्तर पर राष्ट्रीय मितव्ययिता और प्रगति को बनाये रखने के लिए देश के सभी पुस्तकालयों के कार्यों में तालमेल रखना होता है। इस कार्य को प्रभावपूर्ण विधि से करने के लिए इसे निम्नलिखित कार्य करना चाहिए
(i) समय-समय पर व्यावसायिक सम्मेलन और संगोष्ठियां आयोजित करना,
(ii) पुस्तकालय विज्ञान का देश-विदेश में प्रचलित शोध कार्यों और प्रयोगों पर प्रकाश डालने  के लिए नियमित रूप से पत्रिका प्रकाशित करना।
(iii) देश के अन्य पुस्तकालयों को मार्ग दर्शन प्रदान करना,
(iv) पुस्तकालय विज्ञान की नवीनतम पद्धति और प्रक्रियाओं से पुस्तकालयों को अवगत
कराने के लिए समय-समय पर पुनश्चर्या पाठ्यक्रम (रिफ्रेसर कोर्स) आयोजित करना,
एवं
(v) आवश्यक, सहायक और सन्दर्भ ग्रंथों को प्रकाशित करना।

7.6. प्रयोगशाला सम्बन्धी कार्य

ज्ञान के क्षेत्र में लगातार वृद्धि के कारण ज्ञान के नये सूक्ष्म विषय प्रकाश में आ रहे है। ज्ञान के भौतिक माध्यमों में भी निरन्तर परिवर्तन और परिवर्धन हो रहा है। नवीनतम ज्ञान के सदुपयोग हेतु पुस्तकालयों में उनका व्यवस्थित संगठन और विकेंद्रीकरण के प्रबन्ध का होना आवश्यक है। इसके लिए पुस्तकालय की प्रविधियों जैसे वर्गीकरण पद्धति, सूची संहिता, प्रलेखन प्रविधियां और मानकीकरण पद्धतियों को अद्यतन बनाये रखना आवश्यक है। डॉ. रंगनाथन के अनुसार राष्ट्रीय पुस्तकालय को इस दिशा में आवश्यक शोध और प्रयोग के कार्य को बराबर करते रहना है। इस कार्य से वह न केवल राष्ट्रीय स्तर पर एकरूपता और सामंजस्य बनाये रखेगा, बल्कि अन्तर्राष्ट्रीय सहयोग के आधार पर विश्व के प्रमुख पुस्तकालयों के प्राविधिक और सेवा के कार्यों में संगति तथा एकरूपता बनाये रखने में सहायक सिद्ध होगा।
के. डब्ल्यू हन्फ्रीज (K.W. Humphreys) के अनुसार एक राष्ट्रीय पुस्तकालय के मुख्य कार्य निम्न लिखित होते है:
(i) राष्ट्र के साहित्य का केन्द्रीय संग्रह;
(ii) विदेशी साहित्य का संग्रह
(iii) राष्ट्रीय ग्रन्थ सूची का प्रकाशन;
(iv) अन्तर-पुस्तकालय सेवा प्रदान करना;
(v) राष्ट्रीय वांगमय सूचना केन्द्र
(vi) पाण्डुलिपि केन्द्र;
(vii) पुस्तकालय प्रक्रिया तकनीकी में शोध;
(viii) अन्तर्राष्ट्रीय विनिमय सेवा;
(ix) नेत्रहीनों के लिए पुस्तकें;
(४) पुस्तकालय तकनीकों में सहायता;
(xi) पुस्तकालय नियोजन।
हम्फ्रीज के अनुसार उपरोक्त कार्यों में i-iv तक के कार्य आधारभूत, V-vii तक के कार्य वांछनीय एवं शेष ix-xi तक ऐच्छिक कार्य है।
इस प्रकार हम देखते है की राष्ट्रीय पुस्तकालय का कार्य बहुत ही विस्तृत। है। शिक्षा के विकास के साथ-साथ इसके कार्यों का भी विस्तार होता जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में अब राष्ट्रीय पुस्तकालयों के क्षेत्र में नई प्रवृत्ति प्रारम्भ हुई है जिसके अनुसार राष्ट्रीय पुस्तकालयों को विषयानुसार स्थापित करना प्रारम्भ हो गया है। जैसे राष्ट्रीय विज्ञान पुस्तकालय, राष्ट्रीय कृषि पुस्तकालय, राष्ट्रीय आयुर्वेद पुस्तकालय इत्यादि। 

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