3.1.3. विद्यालय पुस्तकालय का संगठनात्मक ढाँचा - Emitra Tutorials

Thursday, January 3, 2019

3.1.3. विद्यालय पुस्तकालय का संगठनात्मक ढाँचा

3.1.3. विद्यालय पुस्तकालय का संगठनात्मक ढाँचा

विद्यालय पुस्तकालय का संगठनात्मक ढाँचा साधारणत: निम्न तीन रूपों में पाथा जाता है।
(i) एक विशाल कक्ष या महाकक्ष में एक केन्द्रीय पुस्तकालय : पुस्तकालय का सारा कार्य
यहीं पर किया जाता है। (ii) कक्षा पुस्तकालय : प्रत्येक कक्षा में अध्यापनीय विषयों से संबद्ध ग्रन्थ संग्रह उपलब्ध
रहता है, ताकि शिक्षक पढ़ाते समय छात्रों का ध्यान उनकी ओर आकृष्ट करे। छोटी

कक्षाओं के, लिए कक्षा पुस्तकालय की व्यवस्था की जाती हैं। (iii) विषयगत पुस्तकालय अथवा विभागीय पुस्तकालय : प्रमुख अध्यापनीय विषयों से संबन्ध 

पुस्तकों को अलग-अलग कक्षों में संग्रह रहता है। उच्चतर माध्यमिक स्तर पर
इस प्रकार के पुस्तकालय स्थापित किये जाते है। '
3.1.4. विद्यालय पुस्तकालय का प्रशासन
विद्यालय का संगठन और प्रबन्ध करने का दायित्व स्थानीय सरकार पर होता है। इसलिए उससे संबन्ध पुस्तकालयों का संचालन वह विद्यानतः नगर के केन्द्रीय पुस्तकालय के पुस्तकालयाध्यक्ष के परामर्श से निम्न समिति और पदाधिकारियों के सहयोग से करती है।
(i) विद्यालय पुस्तकालय समिति (ii) प्रधानाध्यापक, तथा ।
(ii) विद्यालय के पुस्तकालयाध्यक्ष 3.1.5. संग्रह
। विद्यालय पुस्तकालय का प्रथम दायित्व है कि वे पुस्तकालय में अच्छी पुस्तकों के संग्रह करे, जो छात्र-छात्राओं को ज्ञान और अध्यापकों को अध्यापन में सहायता कर सके।

3.1.6. विद्यालय पुस्तकालय की सेवायें

विद्यालय पुस्तकालय से निम्नलिखित सेवाओं की अपेक्षा की जाती है। (i) पुस्तक निर्गमन सेवा, (i) सूचना एवं संदर्भ सेवा, (iii) सलाहकारी सेवा विशेषरूप से व्यावसायिक सलाह,
(iv) विषय-विशेष पर अध्ययन सूची तैयार करना।

3.1.7. विद्यालय पुस्तकालय के लिए भौतिक सुविधा

भौतिक सुविधा पुस्तकालय के लिए सर्व प्रथम है। पुस्तकालय को जो स्थान दिया जाय वह ऐसा हो कि वहाँ पुस्तकें और अन्य सामग्री का प्रदर्शन हो सके। विद्यालय पुस्तकालय को लगभग 25, 000 पुस्तकों को रखने व प्रदर्शित करने के लिए स्थान उपलब्ध होना चाहिए।

3.1.8. विद्यालय पुस्तकालय बजट

विद्यालय पुस्तकालय का बजट संस्था के वार्षिक बजट का 10% से 15% होना चाहिए। पुस्तकालय भवन, फर्नीचर और उपकरणों के लिए इसके अतिरिक्त बजट होना चाहिए।
3.1.9. कर्मचारियों की योग्यता
पुस्तकालय की सफलता उसके कर्मचारियों की कुशलता के ऊपर निर्भर करती है। अत: पुस्तकालय कर्मचारियों को प्रशिक्षित होना चाहिए। पुस्तकालय कर्मचारियों का वेतन विद्यालय के अध्यापकों के समान होना चाहिए।
3.2. महाविद्यालय पुस्तकालय
शिक्षा प्रक्रिया में महाविद्यालय महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते है। महाविद्यालय उच्च शिक्षा का प्रवेश द्वारा है। किसी भी विषय का गंभीर अध्ययन यहीं से आरंभ होता है। अध्ययन को व्यापक, तुलनात्मक और प्रायोगिक रूप देने के लिए कक्षा शिक्षण के अतिरिक्त स्वाध्याय करना अति आवश्यक होता है । छात्रों के स्वाध्याय को सरल और सुगम बनाने के लिए महाविद्यालय स्तर पर पुस्तकालय की व्यवस्था की जाती है। कक्षा में प्रदत्त शिक्षा को छात्र स्वयं परिवर्धित कर सके इस उद्देश्य से शिक्षकों की शिक्षण पद्धति पुस्तकालयोन्मुखी होनी चाहिए। अध्यापनीय विषयों की मौलिक बातों को बतलाकर उनका तुलनात्मक अध्ययन करने के लिए शिक्षक छात्रों को पुस्तकालय जाने की सलाह देते है। किसी भी महाविदयालय के उद्देश्य एवं कार्य निम्न होते है। |
(i) छात्र-छात्राओं को विभिन्न प्रकार के ज्ञान की गहनता से जानकारी उपलब्ध कराना,
(ii) विषय के क्षेत्रों का ज्ञान कराना और प्रतिभाशाली छात्रों को विषय की विशेष शाखा का । विस्तृत ज्ञान कराना, (ii) छात्र-छात्राओं को विभिन्न व्यवसायों में प्रवेश के लिए तैयार करना,
(iv) कुशल प्रबन्धक व प्रशासक तैयार करना,
(v) ज्ञानवान, सभ्य एवं सुसंस्कृत नागरिक तैयार करना। महाविद्यालय में विद्यार्थियों को सामूहिक क्रिया-कलापों में भाग लेने का अवसर मिलता है। ये सामूहिक क्रियायें व्यक्ति
की संगठनात्मक एवं नेतृत्व की क्षमता एवं बुद्धि का विकास करती है।

3.2.1. महाविदयालय पुस्तकालय के उद्देश्य

महाविद्यालय पुस्तकालय के निम्नलिखित उद्देश्य होते है, (i) व्यक्तिगत सेवा और मार्गदर्शन द्वारा कक्षा-शिक्षा को व्यापक और तुलनात्मक रूप
देना, (ii) ज्ञान के क्षेत्र में स्वावलम्बी होने के लिए स्वाध्याय पर जोर देना,
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(ii) विविध प्रकार से विद्यार्थियों के सामान्य ज्ञान और शिक्षा को बढ़ाना,
(iv) छात्र-छात्राओं की बुद्धि को सूक्ष्म दृष्टि को व्यापक और स्मृति को विकसित करना, एवं
(v) शिक्षकों को अध्ययन अध्यापन में आवश्यक सहयोग प्रदान करना।

3.2.2. महाविद्यालय पुस्तकालय के प्रकार ।

साधारणत: निम्न पाँच प्रकार के महाविद्यालय एवं उससे सम्बन्ध पुस्तकालय होते है।
(i) स्नातकपूर्व महाविद्यालय पुस्तकालय
(i) स्नातकोत्तर महाविद्यालय पुस्तकालय
(iii) तकनीकी महाविद्यालय पुस्तकालय (कृषि, यांत्रिकी, पोलिटेकनिक महाविद्यालय
पुस्तकालय आदि)
(iv) चिकित्सा महाविद्यालय पुस्तकालय एवं
(v) प्रशिक्षण महाविद्यालय पुस्तकालय।

3.2.3. महाविद्यालय पुस्तकालय के कार्य

महाविद्यालय पुस्तकालय का प्रमुख कार्य महाविद्यालय के उद्देश्यों की प्राप्ति में सहयोग करना है। इस कार्य हेतु पुस्तकालय को महाविद्यालय के शिक्षकों और छात्रों की पाठन एवं शोध सम्बन्धी आवश्यकताओं को पूरा करना होता है। महाविद्यालय के पुस्तकालयों का निम्नलिखित कार्य है : -
1. पाठ्य सामग्री का संग्रह - महाविद्यालय शिक्षा को सफल बनाने के लिए आवश्यक ग्रंथों का संग्रह करना पुस्तकालय का मुख्य कार्य है।डॉ. रंगनाथन के अनुसार संग्रहीत ग्रन्थों में निम्नलिखित साहित्य उपलब्ध होना चाहिए।
(i) पर्याप्त मात्रा में पाठ्य पुस्तक और उनकी प्रतियाँ, (ii) सूचना साहित्य, दैनिक पत्र और लोकप्रिय पत्रिकाएँ, (iii) प्रेरणादायक तथा विचारोत्तेजक के सहायक ग्रन्थ, (iv) विश्व साहित्य के चुने हुए ग्रन्थ (V) मनोरंजक साहित्य-कथा, कहानी, उपन्यास, नाटक, निबन्ध, कविता, आदि। (vi) अध्यापन पद्धति परक ग्रन्थ, (vii) वांइ.गमय सूचियाँ, (viii) विकलांग व्यक्तियों के लिए आवश्यक विशिष्ट साहित्य, जैसे ब्रेल साहित्य, (ix) उद्योग-धंधों के ग्रन्थ, (x) मौलिक सन्दर्भ ग्रन्थ, तथा (xi) चरित्र और राष्ट्र निर्माण संबन्धी ग्रन्थ अर्थात जीवनी साहित्य। 2. पाठकों को पुस्तकालय के उपयोग के लिए प्रशिक्षित करना। 3. अध्ययन के समय उन्हें आवश्यक मार्ग दर्शन तथा बौद्धिक सहयोग देना, ताकि वे तुलनात्मक दृष्टि से अध्ययन कर सकें।

4. अध्यापकों को उनके शिक्षण कार्य में सहयोग देना।

5. निर्धारित नीति के अनुसार विस्तार सेवाओं का आयोजन करना।
6. पुस्तकालय के कार्यों को अधिक प्रभावशाली बनाने के हेतु अन्य पुस्तकालय के साथ सहकारिता के कार्य को करना।
7. पुस्तक आदान-प्रदान सेवा भी महाविद्यालय पुस्तकालय का एक आवश्यक कार्य है।
इस कार्य को प्राय: सभी पुस्तकालय करते है। इस सेवा में कम से कम श्रम एवं समय | लगे, इस बात पर ध्यान देना आवश्यक है। 8. सन्दर्भ सेवा के द्वारा सामान्य सूचनायें प्रदान करना। 9. वांड़.गमय सूचियों, अनुक्रमणिकाओं तथा सारांशों का निर्माण करना तथा
10. पाठकों के लिए प्रतिलिपि सेवा प्रदान करना।
 3.2.4. संग्रह
महाविद्यालय पुस्तकालय को पाठ्य सामग्री संग्रह करते समय अपने कर्मचारियों और छात्रों की आवश्यकता को ध्यान में रखना चाहिए। एक अच्छा पुस्तकालय संग्रह की निम्नलिखित विशेषतायें होनी चाहिए। (i) उत्तम कोटि के पुस्तकों का संग्रह किया जाना चाहिए।

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